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Dahej Pratha Essay In Hindi Pdf

दहेज़ एक सामाजिक अपराध हैं जब भी इस कारण किसी लड़की को जान गँवानी पड़ती हैं तो तरस आता हैं उस नौजवान पर कि अपने आपको मर्द कहने वाला असल में कायर हैं उसके कन्धों में इतना बल नहीं कि एक परिवार बना सके | जब दम नहीं तो स्वीकार करों यूँ औरत के जीवन का फैसला करने का कोई हक़ नहीं हैं | बेटी के माता पिता को उसे पढ़ाकर अपने पैरों पर खड़ा करने का काम करना चाहिए ना कि कुछ चंद रुपये देकर उसे किसी के हवाले क्यूंकि आपका यह सोचना कि इस सबके बाद आपकी बेटी खुश हैं या आपके कन्धों पर उसका कोई बोझ नहीं, तो आप गलत हैं | ना बेटी खुश हैं और उसके दुःख का भार, आप पर जिंदगीभर हैं |

दहेज़ प्रथा पर हिंदी स्लोगन Dahej Pratha Slogan In Hindi

 

Dahej Pratha Slogan In Hindi 1

तेरी ही बगिया में खिली
तितली बन आसमां में उड़ी हूँ
मेरी उड़ान को तू  शर्मिंदा ना कर
ए बाबूल मुझे दहेज़ देकर बिदा ना कर

Dahej Pratha Slogan In Hindi 2

अरमानो का मोल लगाना बंद करो
दहेज़ के लिए लड़का बेचना बंद करों

Dahej Pratha Slogan In Hindi 3

सरेआम नीलामी की मौहर लगती हैं लड़के के माथे पर
और सीना तान इज्ज़त पाने खड़े हैं लड़की के द्वारे पर

Dahej Pratha Slogan In Hindi 4

बिकता हैं लड़का  
शर्मिंदा क्यूँ हैं लड़की
औकात लड़के की ही दिखती हैं
बाजार में लड़की नहीं बिकती हैं

Dahej Pratha Slogan In Hindi 5

आशीर्वाद कह कर देते हैं दहेज़
क्यूँ अपने दुलार को शर्मिंदा करते हैं
चंद रुपये में तौल दिया बेटी का प्यार
क्यूँ बेटी पर माँ बाप ये वार करते हैं

Dahej Pratha Slogan In Hindi 6


दहेज़ देना भी अपराध हैं
जो देते हैं वही चाहते भी हैं
पैसो के मोल खुशियाँ ना खरीदों
जीते जी बेटियों को ना खरीदों ना बेचों  

Dahej Pratha Slogan In Hindi 7

चंद पैसों के लिए जला दिया किसी के अरमानो को
ये लड़ाई हैं सबकी मारों उन दहेज़ के दीवानों को

Dahej Pratha Slogan In Hindi 8

दहेज़ एक प्रथा नहीं
हैं भीख मांगने का सामाजिक तरिका
फर्क इतना हैं बस

देने वाले की गर्दन झुकी हैं
लेने वाले की अकड़ बढ़ी हैं

Dahej Pratha Slogan In Hindi 9

समाज के तरीको ने ही बनाया हैं बेटी को पराया
दहेज़ हो या कन्या भ्रूणहत्या अपनों ने ही कहर हैं बरसाया

Dahej Pratha Slogan In Hindi 10


लड़की हूँ मैं, नहीं कोई सामान
मत बेचों मुझे, बाजार के दाम
शेयर मार्केट का मैं कोई दाम नहीं
मेरी जिन्दगी इतनी भी आम नहीं

ऊपर लिखे  Dahej Pratha Slogan In Hindi मेरे अन्दर का गुस्सा हैं जो मुझे आये दिन पढ़ने वाली ख़बरों से आता हैं जिनमे दहेज़ के कारण जला दिया या दहेज़ के कारण आत्महत्या की जैसी घटनाये होती हैं | मैं भी एक लड़की हूँ जब अपनी माँ को अपनी शादी के लिए परेशान देखती हूँ तो इस समाज पर गुस्सा आता हैं ऐसे रीतिरिवाज बनाये ही क्यूँ ? जिसमे लालच जन्म ले | हम मानते हैं रीतिरिवाज कुछ सोच कर बनाये जाते हैं पर जब वे इतना भयावह रूप लेले तो उन्हें उखाड़ कर फेंक देना चाहिए | दहेज़ प्रथा को बढ़ावा उच्च परिवार जयादा देते हैं जो अपने प्यार को आशीर्वाद को रुपए उपहार के रूप में व्यक्त करते हैं | अपने रुतबे का दिखावा करते हैं | पर वे ये नहीं जानते उनके इस दिखावे के कारण वे जाने अनजाने किसी की हत्या, किसी की आत्महत्या का कारण बनते जा रहे हैं |

दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए युवा वर्ग को अहम् कदम उठाने की जरुरत हैं | जब लड़का एवम लड़की इसका विरोध करेंगे तब ही यह प्रथा बंद होगी |

Dahej Pratha Slogan In Hindi आपको कैसे लगे कमेंट करे |

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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दहेज का अर्थ है जो सम्पत्ति, विवाह के समय वधू के परिवार की तरफ़ से वर को दी जाती है। दहेज को उर्दू में जहेज़ कहते हैं। यूरोप, भारत, अफ्रीका और दुनिया के अन्य भागों में दहेज प्रथा का लंबा इतिहास है। भारत में इसे दहेज, हुँडा या वर-दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है तथा वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है। आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा नाम की बुराई हर जगह फैली हुई हँ। पिछड़े भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा अभी भी विकराल रूप में है।[1]

हत्याएँ[संपादित करें]

देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए। आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है।[2]

कानून[संपादित करें]

  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और 15,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
  • दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए जो कि पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा सम्पत्ति अथवा कीमती वस्तुओं के लिए अवैधानिक मांग के मामले से संबंधित है, के अन्तर्गत 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है।
  • धारा 406 के अन्तर्गत लड़की के पति और ससुराल वालों के लिए 3 साल की कैद अथवा जुर्माना या दोनों, यदि वे लड़की के स्त्रीधन को उसे सौंपने से मना करते हैं।
  • यदि किसी लड़की की विवाह के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है और यह साबित कर दिया जाता है कि मौत से पहले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के अन्तर्गत लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]